उपमानवाची पूर्वपदमूरुत्तरपदं यत्प्रातिपदिकं तस्मादूङ् स्यात्।
करभोरूः।
जिसका पूर्वपद उपमानवाची तथा उत्तरपद ऊरु हो तो उससे स्त्रीत्व की विवक्षा में ऊङ् प्रत्यय होता है।
करभोरूः। करभ के समान अर्थात् मांसल जंघा वाली स्त्री। करभौ इव ऊरु यस्याः इस विग्रह में बहुव्रीहि समास होकर करभोरु बना है। इससे ऊरुत्तरपदादौपम्ये से
ऊङ् करके अनुबन्धलोप, सर्वणदीर्घ, स्वादिकार्य करके करभोरूः सिद्ध हो जाता है। स्मरण रहे कि ऊङन्त से हल्ड्यादिलोप नहीं होता। अतः सू को रुत्वविसर्ग हो गया है।