क्रीतान्ताददन्तात् करणादेः स्त्रियां डीष् स्यात्।
वस्त्रक्रीती। क्वचिन्न- धनक्रीता।
१२६४- क्रीतात् करणपूर्वात्। करणं पूर्वं यस्य तत् करणपूर्वम्, तस्मात्। क्रीतात् पञ्चम्यन्तं, करणपूर्वात् पञ्चम्यन्तं, द्विपदं सूत्रम्। अन्यतो डीष् से डीष् की अनुवृत्ति आती है। अतः, प्रातिपदिकात्, स्त्रियाम्, प्रत्ययः और परश्च का अधिकार है।
क्रीत शब्द जिसके अन्त में हो तथा करणवाचक जिसका पूर्वावयव हो ऐसे अदन्त प्रातिपदिक से स्त्रीत्व की विवक्षा में डीष् प्रत्यय होता है।
वस्त्रक्रीती। वस्त्रों के द्वारा खरीदी गई स्त्रीलिंग की वस्तु भूमि, स्त्री आदि। वस्त्रैः क्रीता इस विग्रह में कर्तृकरणे कृता बहुलम् से समास हुआ है। अतः करणपूर्व है साथ क्रीत अन्त में तो है ही। वस्त्रक्रीत से स्त्रीत्व की विवक्षा में क्रीतात् करणपूर्वात् से डीष् होकर अनुबन्धलोप, भसंज्ञक अकार का लोप, वर्णसम्मेलन करके स्वादिकार्य करने पर वस्त्रक्रीती सिद्ध हो जाता है।
उक्त सूत्र कहीं कहीं नहीं भी लगता है। अतः धनक्रीता में डीष् न होकर टाप् हुआ- धनक्रीता बना।