Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 60
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VṛttiGovind
LSK 1261
डीष्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
पुंयोगादाख्यायाम्
Aṣṭādhyāyī 4.1.48
Vṛtti Varadarājācārya

या पुमाख्या पुंयोगात् स्त्रियां वर्तते, ततो डीष्।

गोपस्य स्त्री गोपी।

वार्तिकम्- पालकान्तान्न।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१२६१- पुंयोगादाख्यायाम्। पुंयोगात् पञ्चम्यन्तं, आख्यायां, सप्तम्यन्तं द्विपदमिदं सूत्रम्। प्रातिपदिकात् आदि का अधिकार पूर्ववत् है ही।

पुरुष के साथ सम्बन्ध के कारण जब पुंवाचक शब्द स्त्रीलिङ्ग में प्रयुक्त हो तो उस अदन्त शब्द से डीष् प्रत्यय होता है।

स्त्री वह पत्नी भी हो सकती है और पुत्री, बहन आदि भी हो सकती है। गोपस्य पत्नी, भगिनी, पुत्री गोपी। बकस्य भगिनी बकी आदि।

गोपस्य स्त्री, गोपस्य पत्नी, गोपस्य भगिनी, गोपस्य पुत्री गोपी। गोपी। गोप की स्त्री, पत्नी, बहन, पुत्री गोपी कहलाती है। गोप शब्द अदन्त है और स्त्रीत्व की विवक्षा में पुरुष के साथ सम्बन्ध जोड़कर बोला जा रहा है। पुंयोगादाख्यायाम् से डीष्, अनुबन्धलोप, भसंज्ञक अकार का लोप करके गोप्+ई=गोपी, सु आदि कार्य करके गोपी सिद्ध हुआ।

पालकान्तान्न। यह वार्तिक है। पालक अन्त में होने वाले शब्द से स्त्रीत्व विवक्षा में पुंयोग होने पर भी डीष् नहीं होता। पालक अन्त में हो ऐसे शब्दों से भी पुंयोगादाख्यायाम् से डीष् प्राप्त होता है। यह वार्तिक उसका अपवाद है। अतः अजाद्यतष्टाप् से टाप् प्रत्यय होता है।