Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 60
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VṛttiGovind
LSK 1259
वैकल्पिक-डीष्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
वोतो गुणवचनात्
Aṣṭādhyāyī 4.1.44
Vṛtti Varadarājācārya

उदन्ताद् गुणवाचिनो वा डीष् स्यात्। मृद्गी, मृदुः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

ह्रस्व उकारान्त शब्दों से स्त्रीत्व-विवक्षा में वैकल्पिक डीष् प्रत्यय होता है।

मृद्गी, मृदुः। कोमल। ह्रस्व उकारान्त मृदु शब्द से वोतो गुणवचनात् से डीष्, अनुबन्धलोप, मृदु+ई में यण् होकर व्, मृद्+व्+ई=मृद्गी, सु विभक्ति, लोप होकर मृद्गी बना। इसके रूप नदी शब्द की तरह होते हैं। डीष् वैकल्पिक है, न होने के पक्ष में केवल मृदु है, सु, रुत्वविसर्ग करके मृदुः सिद्ध हो जाता है। इसके रूप धेनु शब्द की तरह होते हैं- मृदुः, मृदू, मृदवः। नपुंसक में तो मृदु, मृदुनी, मृदूनि आदि मधु-शब्द की तरह बनते हैं।

पट्वी, पटुः। चतुर स्त्री। ह्रस्व उकारान्त पटु शब्द से वोतो गुणवचनात् से डीष्, अनुबन्धलोप, पटु+ई में यण् होकर व्, पट्+व्+ई=पट्वी, सु विभक्ति, पट्वी। डीष् न होने के पक्ष में केवल पटु है, सु, रुत्वविसर्ग करके पटुः सिद्ध हो जाता है।