वर्णवाची योऽनुदात्तान्तस्तोपधस्तदन्तादनुपसर्जनात् प्रातिपदिकाद्वा डीप्, तकारस्य नकारादेशश्च। एनी, एता। रोहिणी, रोहिता।
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वर्णवाची जो अनुदात्त तकारोपध शब्द, तदन्त अनुपसर्जन प्रातिपदिक से परे स्त्रीत्व की विवक्षा में विकल्प से डीप् प्रत्यय तथा शब्द में विद्यमान तकार के स्थान पर नकारादेश होता है।
डीप् होने के पक्ष में ही नकारादेश होता है, अन्यथा नहीं होता। यहाँ पर वर्ण शब्द सफेद, लाल आदि रंगों का वाचक है।
एनी, एता। चितकबरी, अनेक रंगों वाली। एत शब्द विविध रंगों का वाचक है। इससे स्त्रीत्व की विवक्षा में वर्णादनुदात्तात्तोपधात्तो नः से डीप् प्रत्यय और उसके साथ में एत के तकार के स्थान पर नकार आदेश होकर एन+ई बना। भसंज्ञक अकार का लोप करके एनी बनता है। डीप् न होने के पक्ष में एत से अजाद्यतष्टाप् से टाप् होकर एता बन जाता है। स्वादिकार्य दोनों में करना न भूलें।
रोहिणी, रोहिता। लाल रंगों वाली। रोहित शब्द लाल रंग का वाचक है। इससे स्त्रीत्व की विवक्षा में वर्णादनुदात्तोत्तापधात्तो नः से डीष् प्रत्यय और उसके साथ में रोहित के तकार के स्थान पर नकार आदेश होकर रोहिन+ई बना। भसंज्ञक अकार का लोप करके रोहिनी और णत्व करके रोहिणी बनता है। डीष् न होने के पक्ष में रोहित से अजाद्यतष्टाप् से टाप् होकर रोहिता बन जाता है। स्वादिकार्य दोनों में करना न भूलें। १२५९- वोतो गुणवचनात्। वाव्ययपदं, उतः पञ्चम्यन्तं, गुणवचनात् पञ्चम्यन्तं त्रिपदमिदं सूत्रम्। अन्यतो डीष् से डीष् और मनोरौ वा से वा की अनुवृत्ति आती है। प्रातिपदिकात्, प्रत्ययः, परश्च और स्त्रियाम् का अधिकार पूर्ववत् है।