Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 60
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VṛttiGovind
LSK 1256
डीप्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
वयसि प्रथमे
Aṣṭādhyāyī 4.1.20
Vṛtti Varadarājācārya

प्रथमवयोवाचिनोऽदन्तात् स्त्रियां डीप् स्यात्। कुमारी।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१२५६- वयसि प्रथमे। वयसि सप्तम्यन्तं, प्रथमे सप्तम्यन्तं द्विपदमिदं सूत्रम्। ऋन्नेभ्यो डीप् से डीप् की अनुवृत्ति आती है और प्रातिपदिकात्, प्रत्ययः, परश्च और स्त्रियाम् का पूर्ववत् अधिकार है।

प्रथम अवस्था अर्थात् कौमार अवस्था के सूचक शब्दों से स्त्रीत्व की विवक्षा में डीप् प्रत्यय होता है।

आयु की तीन अवस्था होती है- कौमार, यौवन और वृद्धावस्था। यह सूत्र प्रथम अवस्था के वाचक शब्दों से प्रत्यय का विधान करता है।

कुमारी। कुमार, यह शब्द प्रथमावस्था सूचक है। स्त्रीत्व की विवक्षा में वयसि प्रथमे से डीप्, अनुबन्धलोप, भसंज्ञक अकार का लोप, कुमार्+ई=कुमारी, सु आदि करके कुमारी, कुमार्यौ, कुमार्यः आदि बन जाते हैं।

अन्य उदाहरण- किशोरी। इसी प्रकार किशोर यह भी युवावस्था से पहले की अवस्था का वाचक शब्द है। इससे स्त्रीत्व की विवक्षा में वयसि प्रथमे से डीप्, अनुबन्ध

लोप, भसंज्ञक अकार का लोप, किशोर+ई=किशोरी, सु आदि करके किशोरी, किशोर्यो, किशोर्यः आदि बन जाता है।