यज्ञन्तात् स्त्रियां डीप् स्यात्। अकारलोपे कृते-
१२५२- यज्ञश्च। यज्ञः पञ्चम्यन्तं, च अव्ययपदं, द्विपदं सूत्रम्। ऋत्रेभ्यो डीप् से डीप् की अनुवृत्ति आती है। प्रातिपदिकात्, प्रत्ययः, परश्च, स्त्रियाम् का अधिकार है।
स्त्रीत्व की विवक्षा में यज् प्रत्ययान्त प्रातिपदिक से परे डीप् प्रत्यय होता है।