Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 60
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VṛttiGovind
LSK 1249
टाप्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
अजाद्यतष्टाप्
Aṣṭādhyāyī 4.1.4
Vṛtti Varadarājācārya

अजादीनामकारान्तस्य च वाच्यं यत् स्त्रीत्वं तत्र द्योत्वे टाप् स्यात्।

अजा। एडका। अश्वा। चटका। मूषिका। बाला। वत्सा। होडा। मन्दा।

विलाता इत्यादि। मेधा। गङ्गा। सर्वा।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१२४९- अजाद्यतष्टाप्। अज आदिर्येषां ते अजादयः। अजादयश्च अत् च तेषां समाहारः अजाद्यत्, तस्मात्। अजाद्यतः पञ्चम्यन्तं, टाप् प्रथमान्तं द्विपदमिदं सूत्रम्। ड्याप्प्रातिपदिकात् से प्रातिपदिकात् की अनुवृत्ति आती है और प्रत्ययः, परश्च का अधिकार आता है। स्त्रियाम् का अधिकार तो है ही।

अज आदि गण में पढ़े गये शब्द अथवा ह्रस्व अकारान्त शब्दों से स्त्रीत्व की विवक्षा में टाप् प्रत्यय होता है।

अजादिगण में अजा, एडका आदि अनेक शब्द आते हैं। टकार चुटू से और पकार हलन्त्यम् से इत्संज्ञक है, आ बचता है। इसके बाद अकः सवर्णे दीर्घः से दीर्घ हो जाता है।

अजा। (बकरी) यह अज अजादिगणीय शब्द है। स्त्रीत्व के द्योतन करने में अजाद्यतष्टाप् से टाप् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, अज+आ बना। सवर्णदीर्घ होकर अजा बना। अब आबन्त से सु विभक्ति करके रमा की तरह अजा, अजे, अजा: आदि रूप सिद्ध होते हैं।

एडका। (मादा भेंड़) यह एडक अजादिगणीय शब्द है। स्त्रीत्व के द्योतन करने में अजाद्यतष्टाप् से टाप् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, एडक+आ बना। सवर्णदीर्घ होकर एडका बना। अब आबन्त से सु विभक्ति करके रमा की तरह एडका, एडके, एडका: आदि रूप सिद्ध होते हैं।

अश्वा। (घोड़ी) यह अजादिगणीय शब्द है। स्त्रीत्व के द्योतन करने में अजाद्यतष्टाप् से टाप् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, अश्व+आ बना। सवर्णदीर्घ होकर अश्वा बना। अब आबन्त से सु विभक्ति करके रमा की तरह अश्वा, अश्वे, अश्वा: आदि रूप सिद्ध होते हैं। अब इसी तरह बाल से बाला(बालिका), वत्स से वत्सा(बछिया), चटक से चटका(चिड़िया), मूषक से मूषिका(चूहिया), होड से होडा(कन्या), मन्द से मन्दा(कन्या), विलात से विलाता(कन्या), गङ्गा से गङ्गा(नदी-विशेष)। ये सभी उदाहरण अजादिगण में पठित शब्दों के हैं। ह्रस्व अकारान्त के उदाहरण- सर्व से सर्वा(सभी स्त्री आदि) आदि उक्त रीति से टाप् करके बना सकते हैं।

प्रश्नः- अज आदि शब्दों से भी ह्रस्व अकारान्त होने से ही टाप् हो सकता था, पुनः अजादिगण में इनका पाठ क्यों?

उत्तरः- अजादिगण में इनका पाठ इसलिए है कि सामान्य स्त्रीत्व-विवक्षा में प्राप्त टाप् प्रत्यय को बाधकर जातिविषयक स्त्रीत्वविवक्षा में जातेरस्त्रीविषयादयोपधातु से डीप् प्राप्त होता है और पुंयोग होने पर पुंयोगादाख्यायाम् से डीप् प्राप्त होता है। इन दोनों को बाधकर टाप् ही हो अर्थात् अजादिगणपठित शब्दों से जातिविषयक स्त्रीत्वविवक्षा में और पुंयोग होने पर भी टाप् ही हो, न कि डीप्, डीप् आदि। इसलिए अकारान्त होते हुए भी अजादि में पढ़ा है।