अधिकारोऽयम्, समर्थानामिति यावत्।
अब लघुसिद्धान्तकौमुदी का अन्तिम स्त्रीप्रत्यय-प्रकरण प्रारम्भ होता है। सामान्यतया जो शब्द पहले पुल्लिङ्ग में हो और उसे स्त्रीलिङ्ग में प्रयोग करने की आवश्यकता होने पर उनसे तथा स्वाभाविक ही स्त्रीलिङ्ग में रहने वाले शब्दों से स्त्रीलिङ्गबोध क प्रत्यय किये जाते हैं। ऐसे शब्द जो धातुओं से प्रत्यय होकर कृदन्त बने हों या प्रातिपदिकों से प्रत्यय होकर तद्धितान्त बने हों अथवा अर्थविशेष में समास किये गये हों, या तो अव्युत्पन्न हों, ऐसे सभी शब्दों से स्त्रीत्व अर्थवोधन करने की इच्छा होने पर अर्थात् स्त्रीत्व की विवक्षा होने पर स्त्रीलिङ्गबोधक प्रत्यय होते हैं परन्तु प्रायः अजन्त शब्दों से उनमें भी ज्यादातर अकारान्त शब्दों से ये प्रत्यय किये जाते हैं। हलन्त शब्दों से स्त्रीत्व विवक्षा होने पर भी स्त्रीत्वबोधक प्रत्यय प्रायः कम ही होते हैं।
छात्र, नर, मनुष्य पुल्लिङ्ग है तो स्त्रीलिङ्गबोधक प्रत्यय होकर छात्रा, नारी, मानुषी शब्द बनते हैं। ऐसे के लिए व्याकरणशास्त्र में कुछ प्रकृति-विशेष से कुछ प्रत्ययों का विधान है। ये प्रत्यय स्त्रियाम् इस सूत्र के अधिकार में आते हैं। प्रत्ययः और परश्च का पूरा अधिकार है। उद्याप्प्रातिपदिकात् से प्रातिपदिकात् का भी अधिकार है। स्त्रियाम् के अधिकार में आने वाले प्रत्यय हैं- टाप्, डाप्, चाप्, डीप्, डीष्, डीन्, ऊङ् और ति। इनमें से टाप्, चाप् और डाप् इन तीनों को आप्-शब्द से ग्रहण किया जाता है और डीप्, डीष् और डीन् की डी-शब्द से ग्रहण किया जाता है। हल्ड्याब्भ्यो दीर्घात्सुतिस्यपृक्तं हल् इस सूत्र में आप् और डी इन प्रत्ययों के अन्त में होने पर तदन्त शब्दों से परे सु आदि का लोप किया जाता है और औङ् आपः, आङि चापः आदि में भी आप् का कथन है।
लिङ्ग का निर्धारण तो लिङ्गानुशासन प्रकरण के अन्तर्गत ही हो सकता है किन्तु स्त्रीलिङ्ग के बोधन के लिए कौन सा प्रत्यय लग सकता है, यह वर्णन इस प्रकरण में किया गया है। कुछ शब्द ऐसे भी हैं जो पुल्लिङ्ग में तो नहीं होते किन्तु स्त्रीलिंग में होते हैं। उनको
नित्यस्त्रीलिङ्गशब्द कहा जाता है। इनका विस्तृत ज्ञान वैयाकरणसिद्धान्तकौमुदी में ही हो सकेगा, यहाँ पर दिग्दर्शन मात्र कराया गया है।
१२४८- स्त्रियाम्। स्त्रियाम् सप्तम्यन्तम् एकपदमिदं सूत्रम्। यह अधिकार सूत्र है।
तद्धिता: ४.१.७६ तक प्रत्येक सूत्रों में स्त्रियाम् येह अधिकार के रूप में उपस्थित रहेगा।