Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 59
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VṛttiGovind
LSK 1244
वैकल्पिकसातिप्रत्ययविधायकं सूत्रम्
विभाषा साति कार्त्स्न्ये
Aṣṭādhyāyī 5.4.52
Vṛtti Varadarājācārya

च्चिविषये सातिर्वा स्यात् साकल्ये।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१२४४- विभाषा साति कात्स्ये। विभाषा प्रथमान्तं, साति लुप्तप्रथमाकं पदं, कात्स्ये सप्तम्यन्तं, त्रिपदं सूत्रम्। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्यातिपदिकात्, तद्धिताः का अधिकार है। अभूततद्भावे कृश्चिस्तियोगे सम्पद्यकर्तरि की अनुवृत्ति आ रही है।

च्चि के विषय में विकल्प से साति प्रत्यय होता है यदि सम्पूर्णता अर्थ गम्यमान हो तो।

कृत्स्नं सम्पूर्णम्, तस्य भावः कात्स्यम्। उक्त सूत्र से विहित साति में ईकार की इत्संज्ञा होती है, सात् बचता है। सातिप्रत्ययान्त शब्द की तद्धितश्चासर्वविभक्तिः से अव्ययसंज्ञा होती है।