अवर्णस्य ईत् स्यात् च्चौ।
वेलोपे च्च्यन्तत्वादव्ययत्वम्। अकृष्णः कृष्णः सम्पद्यते, तं करोति
कृष्णीकरोति। ब्रह्मीभवति। गङ्गी स्यात्।
वार्तिकम्- अव्ययस्य च्चावीत्वं नेति वाच्यम्। दोषाभूतमहः। दिवाभूता रात्रिः।
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१२४३- अस्य च्चौ। अस्य षष्ठ्यन्तं, च्चौ सप्तम्यन्तं द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में ई घ्राध्योः
से ई की अनुवृत्ति आती है।
च्चि के परे होने पर अकार के स्थान पर ईकार आदेश करता है।
च्चि के सर्वापहार लोप हो जाने पर भी प्रत्ययलोपे प्रत्ययलक्षणम् की सहायता
से प्रत्यय परे मानकर के ईकारादेश आदि होते हैं।
कृष्णीकरोति। कृष्णीभवति। जो काला नहीं है उसे काला करता है या होता
है। अकृष्णः कृष्णः सम्पद्यते तं करोति यह लौकिक विग्रह और कृष्ण सु अलौकिक
विग्रह में कृश्वस्तियोगे सम्पद्यकर्तरि च्चिः से च्चि, सर्वापहारलोप। प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप्
का लुक्, कृष्ण+करोति बना। अस्य च्चौ से णकारोत्तरवर्ती अकार के स्थान पर ईकार
आदेश करके कृष्णी बना। आगे करोति या भवति है, कृष्णीकरोति, कृष्णीभवति।
ब्रह्मीभवति। जो ब्रह्मभाव का अनुभव नहीं कर रहा था, वह ब्रह्मभाव को प्राप्त
हो रहा है। अब्रह्म ब्रह्म भवति यह लौकिक विग्रह और ब्रह्म सु अलौकिक विग्रह में
कृश्वस्तियोगे सम्पद्यकर्तरि च्चिः से च्चि, सर्वापहारलोप। प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक्,
ब्रह्म बना। अस्य च्चौ से णकारोत्तरवर्ती अकार के स्थान पर ईकार आदेश करके ब्रह्मी बना।
आगे भवति है, ब्रह्मीभवति।
अव्ययस्य च्चावीत्वं नेति वाच्यम्। यह वार्तिक है। च्चि प्रत्यय के परे रहते
अव्यय के अवर्ण के स्थान पर ईकारादेश नहीं होता है, ऐसा कहना चाहिए।
दोषाभूतमहः। अदोषा दोषा सम्पद्यमानं भूतम् अर्थात् जो रात्रि न था किन्तु रात्रि हो गया, ऐसा दिन। दोषा भूतम् में कृश्चिस्तियोगे सम्पद्यकर्तरि च्चिः से च्चि, सर्वापहार, दोषा+भूतम् में अस्य च्चौ से दोषा के आकार को ईकारादेश प्राप्त था, उसका अव्ययस्य च्यावीत्वं नेति वाच्यम् इस वार्तिक से निषेध हो जाने के कारण दोषा भूतम् ही रह गया। दोषा+भूतम् की कुगतिप्रादयः से समास होता है।
दिवाभूता रात्रिः। अदिवा दिवा सम्पद्यमाना भूता अर्थात् जो दिन न थी किन्तु दिन बन गई, ऐसी रात्रि। दिवा भूता में कृश्चिस्तियोगे सम्पद्यकर्तरि च्चिः से च्चि, सर्वापहार, दिवा+भूता में अस्य च्चौ से दिवा के आकार को ईकारादेश प्राप्त था, उसका अव्ययस्य च्यावीत्वं नेति वाच्यम् इस वार्तिक से निषेध हो जाने के कारण दिवा भूता ही रह गया। दिवा+भूतम् की कुगतिप्रादयः से समास होता है।