Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 58
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VṛttiGovind
LSK 1227
अनेककार्यार्थं विधिसूत्रम्
बहोर्लोपो भू च बहोः
Aṣṭādhyāyī 6.4.158
Vṛtti Varadarājācārya

बहो: परयोरिमेयसोर्लोपः स्याद् बहोश्च भूरादेशः। भूमा। भूयान्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१२२७- बहोर्लोपो भू च बहो:। बहो: षष्ठ्यन्तं, लोपः प्रथमान्तं, भू लुप्तप्रथमाकं पदं, च अव्ययपदं, बहो: षष्ठ्यन्तम्, अनेकपदं सूत्रम्। तुरिष्ठेमेयस्सु से इमेयसोः की अनुवृत्ति आती है।

बहु-शब्द से परे इमनिच् और ईयसुन् प्रत्ययों का लोप होता है और बहु-शब्द के स्थान पर भू आदेश भी होता है।

आदे: परस्य की सहायता से इमनिच् और ईयसुन् के केवल आदि वर्ण इकार और ईकार का ही लोप हो जाता है।

भूमा, भूयान्। बहुतायत, अधिकतर। बहोर्भावः। बहु डस् में पृथ्व्यादिभ्य इमनिन्वा से इमनिच् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके बहु+इमन् बना। बहोर्लोपो भू च बहो: से बहु के स्थान पर भू आदेश और आदे: परस्य की सहायता से इमन् के इकार का लोप करके भूमन् बना। स्वादिकार्य करके राजन् शब्द की तरह भूमा, भूमानौ, भूमानः रूप बन जाते हैं। अब द्विवचनविभन्योपपदे तरबीयसुनौ से ईयसुन् होने पर बहु+ईयस् बना है। बहोर्लोपो भू च बहो: से भू आदेश और ईयस् के ईकार का लोप हो जाने पर भूयस् बना। अब श्रेयान् की तरह भूयान्, भूयांसौ, भूयांसः आदि रूप बनाये जा सकते हैं।