केन प्रकारेण कथम्।
इति प्राग्दिशीयप्रकरणम्॥५७॥
१२१७- किमश्च। किमः पञ्चम्यन्तं, चाव्ययपदं द्विपदमिदं सूत्रम्। प्रकारवचने थाल् से विभक्तिविपरिणाम करके प्रकारवचनात् की तथा इदमस्थमुः से थमु की अनुवृत्ति आती है। प्रत्ययः, परश्च, प्राग्दिशो विभक्तिः, ड्याप्प्रातिपदिकात् का अधिकार है।
प्रकारवचन अर्थ में किम् से परे थमु प्रत्यय होता है।
कथम्। किस प्रकार से। केन प्रकारेण लौकिक विग्रह और किम् टा अलौकिक विग्रह है। किमश्च से थमु, अनुबन्धलोप, किमः कः से क आदेश करके कथम्।
परीक्षा
इस प्रकरण के सभी सूत्रों एवं उनके अर्थों पर प्रकाश डालते हुए किन्हीं बीस प्रयोगों की सिद्धि दिखाइये।
श्री वरदराजाचार्य के द्वारा रचित लघुसिद्धान्तकौमुदी में
गोविन्दाचार्य की कृति श्रीधरमुखोल्लासिनी हिन्दी व्याख्या का
प्राग्दिशीयप्रकरण पूर्ण हुआ।
अथ प्रागिवीयाः