Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 57
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VṛttiGovind
LSK 1215
थाल्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
प्रकारवचने थाल्
Aṣṭādhyāyī 5.3.23
Vṛtti Varadarājācārya

प्रकारवृत्तिभ्यः किमादिभ्यस्थाल् स्यात् स्वार्थे।

तेन प्रकारेण तथा। यथा।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१२१५- प्रकारवचने थाल्। प्रकारवचने सप्तम्यन्तं, थाल् प्रथमान्तं द्विपदमिदं सूत्रम्। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः का अधिकार है साथ ही किंसर्वनामबहुभ्योऽद्व्यादिभ्यः यह सूत्र भी अधिकृत है।

‘इस प्रकार से या उस प्रकार से’ आदि प्रकारवचन में किम् आदि शब्दों से थाल् प्रत्यय होता है।

लकार इत्संज्ञक है, था शेष रहता है। किम् शब्द से तो थाल् को बाधकर अग्रिम सूत्र इदमस्थमुः से थमु प्रत्यय हो जाता है।

तथा। उस प्रकार से। तेन प्रकारेण लौकिक विग्रह और तद्+टा अलौकिक विग्रह है। प्रकारवचने थाल् से थाल् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक्, था की प्राग्दिशी विभक्तिः से विभक्तिसंज्ञा, त्यदादीनामः से अत्व करके सु, अव्ययत्वात् विभक्ति का लुक् करने पर तथा सिद्ध हुआ। इसी प्रकार येन प्रकारेण जिस प्रकार से, यत् टा से थाल् आदि करके यथा बनाइये।