Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 57
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VṛttiGovind
LSK 1213
हिल्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
अनद्यतने र्हिलन्यतरस्याम्
Aṣṭādhyāyī 5.3.21
Vṛtti Varadarājācārya

कर्हि, कदा। यर्हि, यदा। तर्हि, तदा।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१२१३- अनद्यतने हिलन्यतरस्याम्। अद्य भवः अद्यतनम्, न अद्यतनम् अनद्यतनं, तस्मिन्।

अनद्यतने सप्तम्यन्तं, हिल् प्रथमान्तम्, अन्यतरस्यां सप्तम्यन्तं, त्रिपदं सूत्रम्। सप्तम्यास्त्रल् से

सप्तम्याः की अनुवृत्ति आती है और प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः का

अधिकार है साथ ही किंसर्वनामबहुभ्योऽद्व्यादिभ्यः यह सूत्र भी अधिकृत है।

अनद्यतन काल में वर्तमान किम् आदि सप्तम्यन्त प्रातिपदिकों से तद्धितसंज्ञक

हिल् प्रत्यय विकल्प से होता है।

कर्हि, कदा। किस अनद्यतन काल में? कब? कस्मिन् अनद्यतने काले? यह

लौकिक विग्रह है। किम् डि में अनद्यतने हिलन्यतरस्याम् से हिल् प्रत्यय, अनुबन्धलोप

होकर किम्+हि बना। प्राग्दिशीय प्रत्यय विभक्तिसंज्ञक हैं, अतः किमः कः से किम् के

स्थान पर क आदेश होकर कर्हि बना और अव्ययसंज्ञा, सु, उसका लुक् करके कर्हि सिद्ध

हुआ। हिल् न होने के पक्ष में सर्वैकान्यकिंयत्तदः काले दा से दा प्रत्यय होकर कदा बन

जाता है।

यर्हि, यदा। जिस अनद्यतन काल में, जब। यस्मिन् अनद्यतने काले? यह

लौकिक विग्रह है। यत् डि में अनद्यतने हिलन्यतरस्याम् से हिल् प्रत्यय, अनुबन्धलोप

होकर यत्+हि बना। प्राग्दिशीय प्रत्यय विभक्ति संज्ञक हैं, अतः त्यदादीनामः से अत्व

होकर यर्हि बना। अव्ययसंज्ञा, सु, उसका लुक् करके यर्हि सिद्ध हुआ। हिल् न होने के पक्ष

में सर्वैकान्यकिंयत्तदः काले दा से दा प्रत्यय होकर यदा बन जाता है।

तर्हि, तदा। उस अनद्यतन काल में, तब। तस्मिन् अनद्यतने काले? यह लौकिक

विग्रह है। तत् डि में अनद्यतने हिलन्यतरस्याम् से हिल् प्रत्यय, अनुबन्धलोप होकर

तत्+हि बना। प्राग्दिशीय प्रत्यय विभक्ति संज्ञक हैं, अतः त्यदादीनामः से अत्व होकर तर्हि

बना। अव्ययसंज्ञा, सु, उसका लुक् करके तर्हि सिद्ध हुआ। हिल् न होने के पक्ष में

सर्वैकान्यकिंयत्तदः काले दा से दा प्रत्यय होकर तदा बन जाता है।