इदम्-शब्दस्य एत इत् इत्यादेशौ स्तो रेफादौ थकारादौ च प्राग्दिशीये परे। अस्मिन् काले एतर्हि। काले किम्? इह देशे।
१११२- एतेतौ रथोः। एतश्च इच्च तेषामितरेतरयोगद्वन्द्व एतेतौ। रश्च थ् च तथौ, तयोः। एतेतौ प्रथमान्तं, रथोः सप्तम्यन्तं, द्विपदं सूत्रम्। इदम इश् से इदमः और प्राग्दिशो विभक्तिः से प्राग्दिशः की अनुवृत्ति आती है। प्रत्ययः का वचनविपरिणाम और विभक्तिविपरिणाम करके प्रत्यययोः बनाया जाता है। यहाँ पर रथोः में यस्मिन् विधिस्तदादावल्ग्रहणे से तदादिविधि करके रादौ और थादौ बन जाता है।
रेफादि और थकारादि प्राग्दिशीय प्रत्यय के परे होने पर इदम् शब्द के स्थान पर 'एत' और 'इत्' ये आदेश होते हैं।
इदम इश् का अपवाद है यह सूत्र। यथासङ्ख्यनियम से रेफ के परे होने पर एत आदेश और थकारादि के परे होने पर इत् आदेश होंगे। अनेकाल् होने के कारण दोनों सर्वादेश हैं।
एतर्हि। इस काल में, अब। अस्मिन् काले। इदम् डि इस अलौकिक विग्रह में सप्तम्यास्त्रल् को बाधकर इदमो हिल् से हिल् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, विभक्ति का लुक् करके इदम्+हिं बना। रेफादि प्रत्यय परे है हिं, अतः एतेतौ रथोः से इदम् के स्थान पर एत सर्वादेश हुआ- एतर्हि बना। तद्धितश्चासर्वविभक्तिः से अव्ययसंज्ञक होने के कारण सु आदि विभक्तियों का अव्ययादाप्सुपः से लुक् हो जाता है। अतः एतर्हि ही बना। काल अर्थ नहीं होने पर इह देशे बनता है।