वा-ग्रहणमपकृष्यते। सप्तम्यन्तात् किमोऽद्वा स्यात्। पक्षे त्रल्।
१२०६- किमोऽत्। किमः पञ्चम्यन्तम्, अत् प्रथमान्तं द्विपदमिदं सूत्रम्। प्रत्ययः, परश्च,
उच्याप्यातिपदिकात्, तद्धिताः का अधिकार है।
पञ्चम्यन्त किम् से परे वैकल्पिक अत् प्रत्यय होता है।
तकार इत्संज्ञक है। अत् न होने के पक्ष में त्रल् होता है।