उन्नता दन्ताः सन्त्यस्य दन्तुरः।
११८९- दन्त उन्नत उरच्। दन्ते सप्तम्यन्तम्, उन्नते सप्तम्यन्तम्, उरच् प्रथमान्तं, त्रिपदं सूत्रम्। तदस्यास्त्यस्मिन्निति मतुप् से तद् अस्य अस्ति अस्मिन् इति इन पदों की अनुवृत्ति आती है और प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, समर्थानां प्रथमाद्वा और तद्धिताः का अधिकार है।
दाँतों का उन्नत होना अर्थ गम्यमान हो तो प्रथमान्त 'दन्त' शब्द से मत्वर्थ में 'उरच्' प्रत्यय होता है।
चकार इत्संज्ञक है, उर बचता है। जहाँ उन्नत दाँत वाला अर्थ न होकर केवल सामान्य दाँत वाला अर्थ होगा, वहाँ उरच् न होकर मतुप् के योग से दन्तवान् बनता है।
दन्तुरः। ऊँचे दाँत वाला व्यक्ति। उन्नता दन्ता सन्त्यस्य। दन्त जस् से दन्त उन्नत उरच् से उरच् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके दन्त+उर बना। भसंज्ञक अकार का लोप करके वर्णसम्मेलन करने पर दन्तुर बना और स्वादिकार्य करके दन्तुरः सिद्ध हुआ। सामान्य अर्थ में मतुप् होकर दन्तवान् बन जाता है।