पञ्च अवयवा अस्य पञ्चतयम्।
११७२- सङ्ख्याया अवयवे तयप्। सङ्ख्यायाः पष्ठ्यन्तं, अवयवे सप्तम्यन्तं, तयप् प्रथमान्तं त्रिपदमिदं सूत्रम्। तदस्य सञ्जातं तारकादिभ्य इतच् से तद् और अस्य इन पदों की अनुवृत्ति आती है। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार पूर्ववत् आ रहा है।
अवयव अर्थ में विद्यमान सङ्ख्यावाचक प्रथमान्त से 'वह इसका अवयव है' इस अर्थ में तयप् प्रत्यय होता है।
पकार इत्संज्ञक है। यकारादि या अजादि न होने से इसके परे होने पर भसंज्ञा नहीं होगी और जित्, णित् और कित् न होने से आदिवृद्धि भी नहीं होगी।
पञ्चतयम्। पाँच अवयव या संख्या है जिसकी, वह। पञ्च अवयवाः अस्य