Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 55
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VṛttiGovind
LSK 1170
वतुप्सन्नियोगघादेश-विधायकं विधिसूत्रम्
किमिदंभ्यां वो घः
Aṣṭādhyāyī 5.2.40
Vṛtti Varadarājācārya

आभ्यां वतुप् स्याद् वकारस्य घश्च।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

११७०- किमिदंभ्यां वो घः। किम् च इदं च तयोरितरेतरयोगद्वन्द्वः किमिदमौ, ताभ्याम्। यत्तदेतेभ्यः परिमाणे वतुप् से परिमाणे वतुप् तथा तदस्य सञ्जातं तारकादिभ्य इतच् से तदस्य की अनुवृत्ति और प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार पूर्ववत् आ रहा है।

परिमाण में वर्तमान किम्, इदम् इन प्रथमान्त प्रातिपदिकों से 'वह परिमाण है इसका' इस अर्थ में वतुप् प्रत्यय और वतुप् के वकार के स्थान पर घकार आदेश होता है।

इस सूत्र से दो कार्य हुए। एक तो किम् और इदम् इन सर्वनामों से वतुप् प्रत्यय और दूसरा वतु के वकार के स्थान पर घ आदेश। वतुप् में अनुबन्धलोप होकर वत् बचा

है। अत् को छोड़कर केवल व् के स्थान पर घ् आदेश होने के बाद उस घकार के स्थान पर भी आयनेयीनीयियः० से इय् आदेश होकर इयत् बन जाता है।