Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 55
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VṛttiGovind
LSK 1169
वतुप्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
यद्तदेतेभ्यः परिमाणे वतुप्
Aṣṭādhyāyī 5.2.39
Vṛtti Varadarājācārya

यत्परिमाणमस्य यावान्। तावान्। एतावान्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

फलानि सञ्जातानि अस्य- फलितो वृक्षः= फल लग गये हैं जिस वृक्ष में।

दीक्षा सञ्जाता अस्य- दीक्षितो यजमानः= दीक्षा हो गई है जिस यजमान की। आदि।

११६९. यत्तदेतेभ्यः परिमाणे वतुप्। यत् च तत् च एतत् च एतेषामितरेतरयोगद्वन्द्वो

यत्तदेतदस्तेभ्यः। यत्तदेतेभ्यः पञ्चम्यन्तं, परिमाणे सप्तम्यन्तं, वतुप् प्रथमान्तं, त्रिपदं

सूत्रम्। तदस्य सञ्जातं तारकादिभ्य इतच् से तद् और अस्य की अनुवृत्ति आती है।

प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार

है।

परिमाण अर्थ में विद्यमान यद्, तद्, एतद् इन प्रथमान्त प्रातिपदिकों से 'वह परिमाण है इसका' इस अर्थ में वतुप् प्रत्यय होता है।

वतुप् में उकार और पकार इत्संज्ञक हैं, वत् शेष रहता है। ध्यान रहे कि वति प्रत्यय वाले वत् से यह वत् भिन्न है। वतिप्रत्ययान्त अव्यय होता है किन्तु वतुप् प्रत्ययान्त के तीनों लिङ्ग में रूप चलते हैं।

यावान्। जो परिमाण है इसका अर्थात् जितना। यत् परिमाणमस्य। यत् सु से यत्तदेतेभ्यः परिमाणे वतुप् से वतुप् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके यत्+वत् बना। आ सर्वनाम्नः से तकार के स्थान पर आकार आदेश करके सर्वादीर्घ करने पर यावत् बना। इससे सु आया। उगित् होने के कारण उगिद्यां सर्वनामस्थानेऽधातोः से नुम् आगम और अत्वसन्तस्य चाधातोः से उपधा को दीर्घ करके यावान्त्+स् बना है। सकार का हल्ड्यादिलोप और तकार का संयोगान्तलोप करने पर यावान् सिद्ध हुआ। आगे यावन्तौ, यावन्तः, यावन्तम्, यावन्तौ, यावतः, यावता, यावद्व्याम्, यावद्भिः आदि रूप बन जाते हैं। स्त्रीत्वविवक्षा में उगितश्च से डीप् करने पर यावती, यावत्यौ, यावत्यः, यावतीम्, यावत्यौ, यावतीः आदि बनते हैं। नपुंसकलिङ्ग में यावत्, यावती, यावन्ती आदि रूप बनते हैं।

इसी तरह से तद् शब्द से तत् परिमाणमस्य उतना परिमाण है जिसका अर्थात् उतना अर्थ में तद् सु से उक्त प्रक्रिया करके तावान्, तावन्तौ, तावन्तः। तावती, तावत्यौ, तावत्यः। तावत्, तावती, तावन्ति आदि बनाइये। इसी तरह एतद् शब्द से इतना परिमाण है इसका अर्थ में एतत् सु से भी उक्त प्रक्रिया के साथ एतावान्, एतावन्तौ, एतावन्तः। एतावती, एतावत्यौ, एतावत्यः। एतावत्, एतावती, एतावन्ति आदि आप सरलता से बन सकते हैं।