तदस्येत्यनुवर्तते। ऊरु प्रमाणमस्य ऊरुद्वयसम्। ऊरुदध्नम्। ऊरुमात्रम्।
११६८- प्रमाणे द्वयसन्दघ्नञ्मात्रचः। द्वयसच्च दघ्नच्च मात्रच्च तेषामितरेतरद्वन्द्वो
द्वयसन्दघ्नञ्मात्रचः। प्रमाणे सप्तम्यन्तं, द्वयसन्दघ्नञ्मात्रचः प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्। तदस्य
संजातं तारकादिभ्य इतच् से तद् और अस्य की अनुवृत्ति आती है। प्रत्ययः, परश्च,
ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार आ रहा है।
प्रमाण में वर्तमान प्रथमान्त प्रातिपदिक से 'वह प्रमाण है इसका' इस अर्थ
में द्वयसच्, दघ्नच् और मात्रच् प्रत्यय होते हैं।
तीनों में चकार इत्संज्ञक है। तीनों प्रत्यय प्रमाण अर्थ में होते हैं।
ऊरुद्वयसम्। ऊरु के बराबर प्रमाण है जिसका अर्थात् नदी का जल ऊरु तक
आता है या अन्य कोई वस्तु जंघा के बराबर है आदि अर्थ। ऊरु सु से प्रमाणे
द्वयसन्दघ्नञ्मात्रचः से द्वयसच् प्रत्यय, चकार का लोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक्
करके ऊरुद्वयस बना। सु आया, उसके स्थान पर नपुंसकलिङ्ग में अम् आदेश करके पूर्वरूप
करने पर ऊरुद्वयसम् बना।
ऊरुदघ्नम्। ऊरु के बराबर प्रमाण है जिसका अर्थात् नदी का जल ऊरु तक
आता है या अन्य कोई वस्तु जंघा के बराबर है आदि अर्थ। ऊरु सु से प्रमाणे
द्वयसन्दघ्नञ्मात्रचः से दघ्नच् प्रत्यय, चकार का लोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक्
करके ऊरुदघ्न बना। सु आया, उसके स्थान पर नपुंसकलिङ्ग में अम् आदेश करके पूर्वरूप
करने पर ऊरुदघ्नम् बना।
ऊरुमात्रम्। ऊरु के बराबर प्रमाण है जिसका अर्थात् नदी का जल ऊरु तक
आता है या अन्य कोई वस्तु जंघा के बराबर है आदि अर्थ। ऊरु सु से प्रमाणे
द्वयसन्दघ्नञ्मात्रचः से मात्रच् प्रत्यय, चकार का लोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक्
करके ऊरुमात्र बना। सु आया, उसके स्थान पर नपुंसकलिङ्ग में अम् आदेश करके पूर्वरूप
करने पर ऊरुमात्रम् बना।