भवत्यस्मिन्निति भवनम्। मुद्गानां भवनं क्षेत्रं मौद्गीनम्।
११६४- धान्यानां भवने क्षेत्रे खज्। धान्यानां षष्ठ्यन्तं, भवने सप्तम्यन्तं, क्षेत्रे सप्तम्यन्तं, खज् प्रथमान्तम् अनेकपदमिदं सूत्रम्। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार आ रहा है।
भवन अर्थात् उत्पत्तिस्थानरूप क्षेत्र अर्थ में किसी धान्यविशेष के वाचक प्रथमान्त शब्दों से खज् प्रत्यय होता है।
खज् में जकार इत्संज्ञक है और खकार के स्थान पर ईन् आदेश हो जायेगा।
मौद्गीनम्। मूंग नामक धान्य(दाल) के होने का क्षेत्र, खेत आदि। मुद्गानां भवनं क्षेत्रम् लौकिक विग्रह और मुद्ग+आम् अलौकिक विग्रह है। ऐसी स्थिति में धान्यानां भवने क्षेत्रे खज् से खज् प्रत्यय हुआ, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक्, आयनेयीनीयियः फढखछ्यां प्रत्ययादीनाम् से खकार के स्थान पर ईन् आदेश, आदिवृद्धि, भसंज्ञक अकार का लोप करके मौद्ग+ईन=मौद्गीन बना। सु, अम्, पूर्वरूप मौद्गीनम्।
गौधूमीनम्। गौधूम अर्थात् गेहूँ धान्य के होने का क्षेत्र, खेत आदि। गौधूमानां भवनं क्षेत्रम् लौकिक विग्रह और गौधूम+आम् अलौकिक विग्रह है। ऐसी स्थिति में धान्यानां भवने क्षेत्रे खज् से खज् प्रत्यय हुआ, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक्, आयनेयीनीयियः फढखछ्यां प्रत्ययादीनाम् से खकार के स्थान पर ईन् आदेश, आदिवृद्धि, भसंज्ञक अकार का लोप करके गौधूम+ईन=गौधूमीन बना। सु, अम्, पूर्वरूप गौधूमीनम्।