Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 54
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VṛttiGovind
LSK 1153
त्व-तल्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
तस्य भावस्त्वतलौ
Aṣṭādhyāyī 5.1.119
Vṛtti Varadarājācārya

प्रकृतिजन्यबोधे प्रकारो भावः। गोर्भावो गोत्वं, गोता। त्वान्तं क्लीबम्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

११५३- तस्य भावस्त्वतलौ। त्वश्च तल् च तयोरितरेतरयोगद्वन्द्वस्त्वतलौ। तस्य षष्ठ्यन्तानुकरणं

लुप्तपञ्चमीकं, भावः प्रथमान्तं, त्वतलौ प्रथमान्तं त्रिपदमिदं सूत्रम्। प्रत्ययः, परश्च,

ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार आ ही रहा है।

‘उसका भाव’ ऐसा अर्थ हो तो षष्ठ्यन्त प्रातिपदिक से त्व और तल् प्रत्यय

होते हैं।

प्रकृतिजन्यबोधे प्रकारो भावः। प्रकृति से उत्पन्न होने वाले बोध अर्थात् ज्ञान

जो विशेषणतया प्रतीत होता है, उसे यहाँ पर भाव कहा गया है। जैसे गो प्रकृति है और

गो में गो का जो गोत्व रहता है, वह ही भाव है अर्थात् गोत्व से युक्त होने पर ही उसे

गाय कहा जाता है। गो में गोत्व विशेषण के रूप में प्रतीत होता है, अतः वह भाव है।

तल् में लकार इत्संज्ञक है। त्व प्रत्यय होने पर शब्द नित्य नपुंसक लिङ्ग वाला

और तल् प्रत्यय होने पर शब्द नित्य स्त्रीलिङ्ग वाला होता है।

गोत्वं, गोता। गौ का भाव। गोर्भावः लौकिक विग्रह और गो डस् अलौकिक

विग्रह है। तस्य भावस्त्वतलौ से त्वप्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक्

करके गोत्व बना। सु विभक्ति, त्वप्रत्ययान्त नपुंसक होता है, अतः सु के स्थान पर अम्

आदेश, पूर्वरूप आदि होकर गोत्वम् सिद्ध हुआ। तल् होने के पक्ष में लकार की इत्संज्ञा होने

के बाद पूर्ववत् कार्य होकर तलन्त स्त्रीलिङ्गी होने के कारण रमा की तरह गोता सिद्ध होता है।

घटत्वं, घटता। घड़े का भाव। घटस्य भावः लौकिक विग्रह और घट डस्

अलौकिक विग्रह है। तस्य भावस्त्वतलौ से त्वप्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप्

का लुक् करके घटत्व बना। त्वप्रत्ययान्त नपुंसक होता है, अतः सु के स्थान पर अम्

आदेश, पूर्वरूप आदि होकर घटत्वम् सिद्ध हुआ। तल् होने के पक्ष में लकार की इत्संज्ञा

होने के बाद पूर्ववत् कार्य होकर तलन्त स्त्रीलिङ्गी होने के कारण रमा की तरह घटता सिद्ध होता है।

अब इसी तरह से भाव अर्थ में त्व और तल् प्रत्यय लगाकर अनेक प्रयोग बना लें। जैसे- सम से समत्व-समता, पात्र से पात्रत्व-पात्रता, विद्वत् से विद्वत्त्व-विद्वत्ता, प्रभु से प्रभुत्व-प्रभुता, पटु से पटुत्व-पटुता आदि।