ब्राह्मणेन तुल्यं ब्राह्मणवद् अधीते।
क्रिया चेदिति किम्? गुणतुल्ये मा भूत्। पुत्रेण तुल्यः स्थूलः।
११५१- तेन तुल्यं क्रिया चेद्वतिः। तेन तृतीयान्तानुकरणं लुप्तपञ्चमीकं, तुल्यं प्रथमान्तं, क्रिया प्रथमान्तं, चेत् अव्ययपदं, वतिः प्रथमान्तम् अनेकपदमिदं सूत्रम्। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार आ ही रहा है।
तृतीयान्त प्रातिपदिक से 'तुल्य' अर्थ में वति प्रत्यय होता है, यदि तुल्यता क्रिया को लेकर हो तो।
वति में इकार इत्संज्ञक है, वत् शेष रहता है। तद्धितश्चासर्वविभक्तिः इस सूत्र के अनुसार वतिप्रत्ययान्त को अव्यय में माना गया है। अतः इस प्रत्यय के बाद सिद्ध हुए शब्द अव्यय कहलाते हैं जिससे की गई विभक्ति का अव्ययादाप्सुपः से लुक् होता है।
ब्राह्मणवत्। यह क्षत्रिय ब्राह्मण के समान (पढ़ता है)। ब्राह्मणेन तुल्यं लौकिक विग्रह और ब्राह्मण टा अलौकिक विग्रह है। तेन तुल्यं क्रिया चेद्वतिः से वतिप्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके ब्राह्मणवत् बना। अव्यय होने के कारण आई हुई विभक्ति का लुक्, ब्राह्मणवत्।