तेन तुल्यमिति वतिं वक्ष्यति, ततः प्राक् ठजधिक्रियते।
११४३- प्राग्वतेष्ठज्। प्राक् अव्ययपदं, वतेः पञ्चम्यन्तं, ठज् प्रथमान्तं, त्रिपदं सूत्रम्।
‘तेन तुल्यं क्रिया चेद्वतिः’ से पहले ठज् का अधिकार है।
जकार इत्संज्ञक है। जित् होने से आदिवृद्धि हो सकेगी। ठ के स्थान पर ठस्येकः से इक आदेश होता है।