Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 50
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VṛttiGovind
LSK 1126
ठक्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
शिल्पम्
Aṣṭādhyāyī 4.4.55
Vṛtti Varadarājācārya

मृदङ्गवादनं शिल्पमस्य मार्दङ्गिकः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

११२६- शिल्पम्। प्रथमान्तमेकपदं सूत्रम्। तदस्य पण्यम् से तदस्य की अनुवृत्ति आती है। ठक्, प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः, समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार है।

‘शिल्प है इसका’ इस अर्थ में प्रथमान्त प्रातिपदिक से ठक् प्रत्यय होता है।

मार्दङ्गिकः। मृदंग बजाने का विशेष ज्ञान है जिसका अर्थात् मृदंग बजाने वाला। मृदङ्गवादनं शिल्पम् अस्य लौकिक विग्रह और मृदङ्ग सु अलौकिक विग्रह है। शिल्पम् से ठक्, अनुबन्धलोप, ठस्येकः से ठ के स्थान पर इक आदेश करके मृदङ्ग+इक बना। कित् होने के कारण किति च से आदिवृद्धि हुई तो ऋकार के स्थान पर आर् होकर और भसंज्ञक अकार का लोप करके मार्दङ्ग+इक=मार्दङ्गिक बना। स्वादिकार्य करके मार्दङ्गिकः सिद्ध हुआ।