Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 50
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VṛttiGovind
LSK 1124
ठक्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
शब्ददर्दुरं करोति
Aṣṭādhyāyī 4.4.34
Vṛtti Varadarājācārya

शब्दं करोति शाब्दिकः। दर्दुरं करोति दार्दुरिकः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

११२४- शब्ददर्दुरं करोति। शब्दश्च दर्दुरश्चानयोः समाहारद्वन्द्वः शब्ददर्दुरं, तम्। शब्ददर्दुरं द्वितीयान्तानुकरणं लुप्तपञ्चमीकं, करोति क्रियापदं, द्विपदं सूत्रम्। ठक्, प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार है।

द्वितीयान्त ‘शब्द’ और ‘दर्दुर’ प्रातिपदिकों से ‘करने वाला’ अर्थ में ठक् प्रत्यय होता है।

शाब्दिकः। शब्द के विषय में कार्य करने वाला, शब्द सम्बन्धी प्रकृति प्रत्यय का विभाग करने वाला। शब्दं करोति=प्रकृतिप्रत्ययविभागपरिकल्पनया व्युत्पादयति। शब्द अम् में शब्ददर्दुरं करोति से ठक्, अनुबन्धलोप, ठस्येकः से ठ के स्थान पर इक आदेश करके शब्द+इक बना। कित् होने के कारण किति च से आदिवृद्धि हुई और भसंज्ञक अकार का लोप करके शाब्द+इक=शाब्दिक बना। स्वादिकार्य करके शाब्दिकः सिद्ध हुआ।

दार्दुरिकः। मिट्टी के पात्र त्रिशेष को बनाने वाला। दर्दुरं करोति। दर्दुर अम् में शब्ददर्दुरं करोति से ठक्, अनुबन्धलोप, ठस्येकः से ठ के स्थान पर इक आदेश करके दर्दुर+इक बना। कित् होने के कारण किति च से आदिवृद्धि हुई और भसंज्ञक अकार का लोप करके दर्दुर+इक=दार्दुरिक बना। स्वादिकार्य करके दार्दुरिकः सिद्ध हुआ।