Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 50
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VṛttiGovind
LSK 1123
ठक्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
रक्षति
Aṣṭādhyāyī 4.4.33
Vṛtti Varadarājācārya

समाजं रक्षति सामाजिकः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

११२३- रक्षति। रक्षति क्रियापदम् एकपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में तत्प्रत्यनुपूर्वमीपलोमकूलम् से तत् की अनुवृत्ति आती है। ठक्, प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार है।

‘उसकी रक्षा करता है’ इस अर्थ में द्वितीयान्त प्रातिपदिक से ठक् प्रत्यय होता है।

सामाजिकः। समाज की रक्षा करने वाला। समाजं रक्षति लौकिक विग्रह और समाज अम् अलौकिक विग्रह है। रक्षति से ठक्, अनुबन्धलोप, ठस्येकः से ठ के स्थान पर इक आदेश करके समाज+इक बना। कित् होने के कारण किति च से आदिवृद्धि हुई और भसंज्ञक अकार का लोप करके सामाज+इक=सामाजिक बना और स्वादिकार्य करके सामाजिकः सिद्ध हुआ।