Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 50
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VṛttiGovind
LSK 1122
ठक्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
उञ्छति
Aṣṭādhyāyī 4.4.32
Vṛtti Varadarājācārya

बदराण्युञ्छति बादरिकः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

११२२- उच्छति। क्रियापदमेकपदं सूत्रम्। तत् प्रत्यनुपूर्वमीपलोमकूलम् से तत् इस द्वितीयान्त पद की अनुवृत्ति आती है और ठक्, प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार है।

‘चुन चुन कर बटोरता है’ इस अर्थ में द्वितीयान्त प्रातिपदिक से ठक् प्रत्यय होता है।

बादरिकः। बेर को चुन चुन कर बटोरने वाला। बदराणि उच्छति लौकिक विग्रह और बदर शस् अलौकिक विग्रह है। उच्छति से ठक्, अनुबन्धलोप, ठस्येकः से ठ के स्थान पर इक आदेश करके बदर+इक बना। कित् होने के कारण किति च से आदिवृद्धि हुई। भसंज्ञक अकार का लोप करके बादर+इक=बादरिक बना और स्वादिकार्य करके बादरिकः सिद्ध हुआ।