दध्ना संसृष्टं दाधिकम्।
११२१- संसृष्टे। संसृष्टे सप्तम्यन्तमेकपदं सूत्रम्। तेन दीव्यति खनति जयति जितम् से तेन की अनुवृत्ति आती है और ठक्, प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्यातिपदिकात्, तद्धिताः और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार है।
‘उससे मिला हुआ’ इस अर्थ में तृतीयान्त प्रातिपदिक से ठक् प्रत्यय होता है।
दाधिकम्। दही से मिला हुआ। दध्ना संसृष्टम् लौकिक विग्रह और दधि टा अलौकिक विग्रह है। संसृष्टे से ठक्, अनुबन्धलोप, ठस्येकः से ठ के स्थान पर इक आदेश करके दधि+इक बना। कित् होने के कारण किति च से आदिवृद्धि हुई और भसंज्ञक इकार का लोप करके दाध्+इक=दाधिक, स्वादिकार्य करके दाधिकम् सिद्ध हुआ।