Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 50
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VṛttiGovind
LSK 1118
ठक्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
संस्कृतम्
Aṣṭādhyāyī 4.4.3
Vṛtti Varadarājācārya

दध्ना संस्कृतम्- दाधिकम्। मारीचिकम्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१११८- संस्कृतम्। संस्कृतम् प्रथमान्तम् एकपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में तेन दीव्यति खनति जयति जितम् से तेन की अनुवृत्ति आती है ठक्, प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार है।

‘उससे संस्कार किया गया’ इस अर्थ में तृतीयान्त प्रातिपदिक से ठक् प्रत्यय होता है।

दाधिकम्। दही से संस्कार किया गया अर्थात् दही मिला कर स्वादिष्ट बनाया गया पदार्थ। दध्ना संस्कृतम् लौकिक विग्रह और दधि टा अलौकिक विग्रह है। संस्कृतम् से ठक्, अनुबन्धलोप, ठस्येकः से ठ के स्थान पर इक आदेश करके दधि+इक बना। कित् होने के कारण किति च से आदिवृद्धि हुई और भसंज्ञक इकार का लोप करके दाध्+इक=दाधिक, स्वादिकार्य करके दाधिकम् सिद्ध हुआ।

मारीचिकम्। मरीच से संस्कार किया गया अर्थात् मरीच नामक मसाला लगाकर स्वादिष्ट बनाया गया पदार्थ। मरीचेन संस्कृतम् लौकिक विग्रह और मरीच टा अलौकिक विग्रह है। संस्कृतम् से ठक्, अनुबन्धलोप, ठस्येकः से ठ के स्थान पर इक आदेश करके मरीच+इक बना। कित् होने के कारण किति च से आदिवृद्धि हुई और भसंज्ञक अकार का लोप करके मारीच्+इक=मारीचिक, स्वादिकार्य करके मारीचिकम् सिद्ध हुआ।