गोः पुरीषं गोमयम्।
१११४- गोश्च पुरीषे। गोः पञ्चम्यन्तं, च अव्ययपदं, पुरीषे सप्तम्यन्तं, त्रिपदमिदं सूत्रम्। तस्य विकारः इस सम्पूर्ण सूत्र तथा मयड् वैतयोर्भाषायामभक्ष्याच्छादनयोः से मयट् की अनुवृत्ति आती है। तद्धिताः, प्रत्ययः, परश्च, समर्थानां प्रथमाद्वा आदि का अधिकार आ ही रहा है।
यदि गोबर अर्थ हो तो गो शब्द से मयट् प्रत्यय होता है।
यह सूत्र गोपयसोर्यत् से प्राप्त यत् का बाधक है।
गोमयम्। गाय का विकार अर्थात् गोबर। गोः विकारः लौकिक विग्रह और गो डस् अलौकिक विग्रह है। गोश्च पुरीषे से मयट्, अनुबन्धलोप होकर गो+मय, सु, अम्, गोमयम्।