Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 49
Show
VṛttiGovind
LSK 1110
अण्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
तस्य विकारः
Aṣṭādhyāyī 4.3.134
Vṛtti Varadarājācārya

वार्तिकम्- अश्मनो विकारे टिलोपो वक्तव्यः।

अश्मनो विकारः आश्मः। भास्मनः। मार्त्तिकः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

अब विकार अर्थ में होने वाले प्रत्ययों का प्रकरण प्रारम्भ होता है। एक वस्तु का दूसरे रूप में परिणत होना विकार कहलाता है। जैसे दूध का विकार दही और दही का विकार मक्खन, इसी प्रकार लकड़ी का विकार दरबाजा, कुर्सी, पलंग आदि। यहाँ पर भी प्रायः सभी सूत्रों में प्राग्दीव्यतोऽण्, तद्धिताः, ड्याप्प्रातिपदिकात्, प्रत्ययः, परश्च, समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार चल रहा है। शेष कार्य पूर्व के अन्य प्रकरणों के जैसे ही हैं।

१११०- तस्य विकारः। तस्य षष्ठ्यन्तानुकरणं लुप्तपञ्चम्यन्तं, विकारः प्रथमान्तं द्विपदमिदं सूत्रम्। तद्धिताः, ड्याप्प्रातिपदिकात्, प्रत्ययः, परश्च, प्राग्दीव्यतोऽण् और समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार चल रहा है।

‘उसका विकार’ इस अर्थ में अण् आदि प्रत्यय होते हैं।

तस्येदम् से तस्य इस पद की अनुवृत्ति हो सकती थी और यहाँ पर पढ़ने की आवश्यकता नहीं थी फिर भी यहाँ पर पढ़ने का तात्पर्य यह है कि शेषाधिकार की अब यहाँ से निवृत्ति होती है।

अश्मनो विकारे टिलोपो वक्तव्यः। यह वार्तिक है। विकार अर्थ में प्रत्यय हो जाने के बाद अश्मन् शब्द के टि का लोप हो। अश्मन् में अन्त्य अच् मकारोत्तरवर्ती अकार और नकार अर्थात् अन् यह टिसंज्ञक है। प्रत्यय होने के बाद अस्मन्+अ ऐसी स्थिति में पहले नस्तद्धिते से टिलोप प्राप्त होता है, उसे प्रकृतिभावविधायक अन् यह सूत्र बाधता है और उसे भी बाधने के लिए यह वार्तिक है, अर्थात् यह वार्तिक अन् इस सूत्र का बाधक है।

आश्मः। पत्थर का विकार अथवा पत्थर से बना हुआ कोई पदार्थ। अश्मनो विकारः लौकिक विग्रह और अश्मन् डन्स् अलौकिक विग्रह है। तस्य विकारः से अण् प्रत्यय हुआ, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक्, अश्मन्+अ बना। णित् होने के कारण आदिवृद्धि हुई और टिसंज्ञक अन् का अश्मनो विकारे टिलोपो वक्तव्यः से लोप हुआ, आश्म्+अ=आश्म बना। स्वादिकार्य करके आश्मः सिद्ध हुआ।

भास्मनः। भस्म का विकार अथवा राख से बना हुआ कोई पदार्थ। भस्मनः विकारः लौकिक विग्रह और भस्मन् डस् अलौकिक विग्रह है। तस्य विकारः से अण् प्रत्यय हुआ, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक्, भस्मन्+अ बना। णित् होने के कारण आदिवृद्धि हुई, भास्मन्+अ=भास्मन बना। स्वादिकार्य करके भास्मनः सिद्ध हुआ। यहाँ पर तो अन् से टिलोप के निषेध होने के बाद इसका वाधक कोई नहीं है। अतः टि का लोप नहीं होता।

मार्त्तिकः। मृत्तिका का विकार अथवा मिट्टी से बनी हुई कोई वस्तु। मृत्तिकायाः विकारः लौकिक विग्रह और मृत्तिका डस् अलौकिक विग्रह है। तस्य विकारः से अण् प्रत्यय हुआ, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक्, मृत्तिका+अ बना। णित् होने के कारण आदिवृद्धि होने पर ऋकार के स्थान पर आर् होकर मार्त्तिका+अ बना। भसंज्ञक आकार का लोप हुआ, मार्त्तिक्+अ=मार्त्तिक बना। स्वादिकार्य करके मार्त्तिकः सिद्ध हुआ।