Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 48
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VṛttiGovind
LSK 1106
अणादिविधायकं विधिसूत्रम्
अधिकृत्य कृते ग्रन्थे
Aṣṭādhyāyī 4.3.87
Vṛtti Varadarājācārya

शारीरकम् अधिकृत्य कृतो ग्रन्थः शारीरकीयः।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

११०६- अधिकृत्य कृते ग्रन्थे। अधिकृत्य ल्यबन्तम् अव्ययम्, कृते सप्तम्यन्तं, ग्रन्थे सप्तम्यन्तं त्रिपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में तद् गच्छति पथिदूतयोः से तद् की अनुवृत्ति आती है। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः, प्राग्दीव्यतोऽण्, समर्थानां प्रथमाद्वा और शेषे का अधिकार है।

द्वितीयान्त प्रातिपदिक से 'आधार मानकर बनाया गया ग्रन्थ' इस अर्थ में अण् आदि प्रत्यय होते हैं।

अधिकृत्य का अर्थ और भी कर सकते हैं, जैसे- अधिकार कर, प्रस्तुत कर, विषय बनाकर आदि।

शारीरकीयः। शारीरक अर्थात् आत्मा को विषय बनाकर बनाया गया ग्रन्थ। शारीरकम् अधिकृत्य कृतो ग्रन्थः लौकिक विग्रह और शारीरक अम् अलौकिक विग्रह है। अधिकृत्य कृतो ग्रन्थः से अणादि छ हुआ क्योंकि यह शब्द आदि अच् वृद्धि वाला है, इसलिए इसकी वृद्धिर्यस्याचामादिस्तद् वृद्धम् से वृद्धसंज्ञा हुई है, और वृद्धाच्छः ने वृद्धसंज्ञक से छ प्रत्यय होने का निर्णय दे दिया है। इसके बाद आयनेयीनीयियः फढखछघां प्रत्ययादीनाम् से छ के स्थान पर ईय्, शारीरक्+ईय भसंज्ञक अकार का लोप करके शारीरक्+ईय=शारीरकीय बना, सु के बाद रुत्वविसर्ग करके शारीरकीयः सिद्ध हुआ।

शाकुन्तलम्। शकुन्तला नामक नायिका को विषय बनाकर बनाया गया नाटक-ग्रन्थ। शकुन्तलाम् अधिकृत्य कृतो ग्रन्थः लौकिक विग्रह और शकुन्तला अम् अलौकिक विग्रह है। अधिकृत्य कृते ग्रन्थे से अण् हुआ, आदिवृद्धि, भसंज्ञक अकार का लोप करके

शाकुन्तल्+अ=शाकुन्तल बना, सु के बाद नपुंसक में अम्, पूर्वरूप करके शाकुन्तलम् सिद्ध हुआ। कालिदास का अभिज्ञानशाकुन्तलम् नामक नाटक बहुत प्रसिद्ध है।