सुघ्नो निवासोऽस्य स्रौघ्नः।
११०७- सोऽस्य निवासः। सः प्रथमान्तानुकरणं लुप्तपञ्चमीकं, अस्य षष्ठ्यन्तं, निवासः प्रथमान्तं त्रिपदमिदं सूत्रम्। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्य्रातिपदिकात्, तद्धिताः, प्राग्दीव्यतोऽण्, समर्थानां प्रथमाद्वा और शेषे का अधिकार है।
प्रथमान्त प्रातिपदिकों से 'वह इसका निवास है' इस अर्थ में अण् आदि प्रत्यय होते हैं।
स्रौघ्नः। सुघ्न नामक देश निवास है जिसका, वह। सुघ्नः निवासः अस्य लौकिक विग्रह और सुघ्न सु अलौकिक विग्रह है। सोऽस्य निवासः से अण् हुआ, अनुबन्ध लोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् कर सुघ्न+अ बना है। णित् होने के कारण आदिवृद्धि करके उकार के स्थान पर औकार आदेश और भसंज्ञक अकार का लोप करके स्रौघ्न+अ=स्रौघ्न बना, सु के बाद रुत्वविसर्ग करके स्रौघ्नः सिद्ध हुआ।