सुघ्नं गच्छति स्रौघ्नः, पन्था दूतो वा।
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११०४- तद् गच्छति पथिदूतयोः। पन्थाश्च दूतश्च तयोरितरेतरद्वन्द्वः पथिदूतौ, तयोः पथिदूतयोः। तत् द्वितीयान्तानुकरणं लुप्तपञ्चमीकं, गच्छति क्रियापदं, पथिदूतयोः सप्तम्यन्तं, त्रिपदं सूत्रम्। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः, प्राग्दीव्यतोऽण्, समर्थानां प्रथमाद्वा और शेषे का अधिकार है।
द्वितीयान्त स... प्रातिपदिकों से 'गच्छति' अर्थात् जाने वाला अर्थ में अण् आदि प्रत्यय होते हैं किन्तु जाने वाला यदि मार्ग या दूत हो तो।
स्रौघ्नः। सुघ्न नामक देश को जाने वाला मार्ग या दूत। सुघ्नं गच्छति पन्था दूतो वा लौकिक विग्रह और सुघ्न अम् अलौकिक विग्रह है। तद् गच्छति पथिदूतयोः से अण् हुआ, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके सुघ्न+अ बना है। णित् होने के कारण आदिवृद्धि करके उकार के स्थान पर औकार आदेश और भसंज्ञक अकार का लोप करके स्रौघ्न+अ=स्रौघ्न बना, सु के बाद रुत्वविसर्ग करके स्रौघ्नः सिद्ध हुआ।