Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 48
Show
VṛttiGovind
LSK 1102
मयट्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
मयट् च
Aṣṭādhyāyī 4.3.82
Vṛtti Varadarājācārya

सममयम्। देवदत्तमयम्।

.....

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

११०२- मयट् च। मयट् प्रथमान्तं, च अव्ययपदं, द्विपदं सूत्रम्। ततः आगतः इस सूत्र का अनुवर्तन एवं प्रत्ययः, परश्च, उच्चाप्रातिपदिकात्, तद्धिताः, समर्थानां प्रथमाद्वा और शेषे का अधिकार है।

हेतुवाचक एवं मनुष्यवाचक पञ्चम्यन्त प्रातिपदिकों से 'तत आगतः' के अर्थ में मयद् प्रत्यय भी होता है।

टकार इत्संज्ञक है, मय बचता है।

सममयम्। सम अर्थात् उचित हेतु से आया हुआ सामान। समादागतम्। सम डसि से मयद् च सूत्र के द्वारा मयद् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके स्वादिकार्य करने पर सममयम् बना। इसी तरह विषमादागतं इस विग्रह में विषम डसि से विषममयम् भी बनाइये।