शुल्कशालाया आगतः शौल्कशालिकः।
१०९९- ठगायस्थानेभ्यः। आयस्य स्थानानि आयस्थानानि, तेभ्यः। ठक् प्रथमान्तम्, आयस्थानेभ्यः पञ्चम्यन्तं, द्विपदं सूत्रम्। तत आगतः की अनुवृत्ति एवं प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः, प्राग्दीव्यतोऽण्, समर्थानां प्रथमाद्वा और शेषे का अधिकार है।
आयस्थान के वाचक पञ्चम्यन्त प्रातिपदिकों से 'आगतः' अर्थ में तद्धितसंज्ञक ठक् प्रत्यय होता है।
ककार इत्संज्ञक है, ठ बचता है। उसके स्थान पर ठस्येकः से इक आदेश हो जाता है। आमदनी के स्थानों को आयस्थान कहते हैं। जैसे कि आयकर, मनोरंजन कर, चुंगी, शुल्क लिए जाने वाले स्थान आदि।
शौल्कशालिकः। चुंगी से आया हुआ। शुल्कशालाया आगतः। शुल्क डसि से ठगायस्थानेभ्यः से ठक्, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके ठस्येकः से इक आदेश, कित् होने के कारण आदिवृद्धि करके भसंज्ञक आकार का लोप, स्वादिकार्य होकर शौल्कशालिकः सिद्ध हो जाता है।