सुघ्नादागतः स्रौघ्नः।
.....
पञ्चम्यन्त समर्थ प्रातिपदिक से 'वहाँ से आया हुआ' इस अर्थ में अण् आदि या यथायोग्य घ आदि प्रत्यय होते हैं।
स्रौघ्नः। सुघ्न नामक देश से आया हुआ। सुघ्नाद् आगतः लौकिक विग्रह और सुघ्न डन्सि अलौकिक विग्रह है। तत आगतः से अण् हुआ, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके सुघ्न+अ बना। णित् होने के कारण आदिवृद्धि करके उकार के स्थान पर औकार आदेश और भसंज्ञक अकार का लोप करके स्रौघ्न+अ=स्रौघ्न बना, सु के बाद रुत्वविसर्ग करके स्रौघ्नः सिद्ध हुआ।
माथुरः। मथुरा नामक देश से आया हुआ। मथुराया आगतः लौकिक विग्रह और मथुरा डन्सि अलौकिक विग्रह है। तत आगतः से अण् हुआ, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके मथुरा+अ बना। णित् होने के कारण आदिवृद्धि करके अकार के स्थान पर आकार आदेश और भसंज्ञक अकार का लोप करके माथुर+अ=माथुर बना, सु के बाद रुत्वविसर्ग करके माथुरः सिद्ध हुआ।
अन्य शब्दों से भी तत आगतः अर्थ में अणादि करके देखिए। जैसे-
राष्ट्रादागतः, राष्ट्रियः। यहाँ घ प्रत्यय होगा क्योंकि शेष अर्थ में राष्ट्रावारपाराद् घखौ से घ हुआ था। इसी प्रकार अवारादागतः अवारीणः, पारादागतः पारीणः, अवारपारीणः, पारावारीणः, ग्राम्यः-ग्रामीणः आदि आदि।