Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 48
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VṛttiGovind
LSK 1085
एण्य-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
प्रावृष एण्यः
Aṣṭādhyāyī 4.3.17
Vṛtti Varadarājācārya

प्रावृषेण्यः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१०८५. प्रावृष एण्यः। प्रावृषः पञ्चम्यन्तम्, एण्यः प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः, समर्थानां प्रथमाद्वा और शेषे का अधिकार है। कालाट्ठञ् से कालात् की अनुवृत्ति आती है।

कालवाचक प्रावृष् इस समर्थ प्रातिपदिक से एण्य प्रत्यय होता है।

काठाट्ठञ् को बाधकर सन्धिवेलाद्यृतुनक्षत्रेभ्योऽण् से अण् प्राप्त होता है, उसका भी यह अपवाद है।

प्रावृषेण्यः। वर्षा ऋतु में होने वाला। प्रावृषि भवः। प्रावृष् डि में ठञ् को बाधकर अण् प्राप्त, उसे भी बाधकर के प्रावृष एण्यः से एण्य प्रत्यय हुआ। प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके प्रावृष्+एण्य बना। वर्णसम्मेलन करके स्वादिकार्य करने पर प्रावृषेण्यः सिद्ध हो जाता है।