यस्य समुदायस्याचां मध्ये आदिर्वृद्धिस्तद्वृद्धसंज्ञं स्यात्।
जिस शब्द के अचों के मध्य में आदि अच् वृद्धिसंज्ञक अर्थात् आ, ऐ, औ हो, उस शब्द की वृद्धसंज्ञा होती है।
वृद्धसंज्ञा का फल वृद्धाच्छः आदि सूत्रों की प्रवृत्ति है। वृद्धिर्यस्याचामादिस्तद् वृद्धम् से वृद्धम् की अनुवृत्ति आती है।