नादेयम्। माहेयम्। वाराणसेयम्।
१०७१- नद्यादिभ्यो ढक्। नद्यादिभ्यः पञ्चम्यन्तं, ढक् प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्य्रातिपदिकात्, तद्धिताः, समर्थानां प्रथमाद्वा और शेषे का अधिकार है।
नदी आदि गणपठित समर्थ सुबन्त प्रातिपदिकों से शेष अर्थ में ढक् प्रत्यय होता है।
ककार इत्संज्ञक है और ढ के ढ के स्थान पर आयनेयीनीयियः फढखछघां प्रत्ययादीनाम् से एय् आदेश होकर एय बन जाता है। कित् होने के कारण किति च से आदिवृद्धि होती है। नदी आदि गण में नदी, मही, वाराणसी, कौशाम्बी, खादिरी, पूर, वन, गिरि, माया आदि शब्द आते हैं।
नादेयम्। नदी में होने वाला या पैदा हुआ। नद्यां जातादि लौकिक विग्रह और नदी डि अलौकिक विग्रह है। नद्यादिभ्यो ढक् से ढक् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके नदी+ढ बना। आयनेयीनीयियः फढखछघां प्रत्ययादीनाम् से ढ के स्थान पर एय् आदेश होकर नदी+एय बना। किति च से आदिवृद्धि करके भसंज्ञक ईकार का लोप होने पर नाद्+एय, वर्णसम्मेलन होने पर नादेय बना। सु, अम्, पूर्वरूप करके नादेयम् सिद्ध हुआ।
माहेयम्। मही अर्थात् पृथ्वी में होने वाला या पैदा हुआ। मह्यां जातादि लौकिक विग्रह और मही डि अलौकिक विग्रह है। नद्यादिभ्यो ढक् से ढक् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके मही+ढ बना। आयनेयीनीयियः फढखछघां प्रत्ययादीनाम् से ढ् के स्थान पर एय् आदेश होकर मही+एय बना। किति च से आदिवृद्धि करके भसंज्ञक ईकार का लोप होने पर माह+एय, वर्णसम्मेलन होने पर माहेय बना। सु, अम्, पूर्वरूप करके माहेयम् सिद्ध हुआ।
वाराणसेयम्। वाराणसी में होने वाला या पैदा हुआ। वाराणस्यां जातादि लौकिक विग्रह और वाराणसी डि अलौकिक विग्रह है। नद्यादिभ्यो ढक् से ढक् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके वाराणसी+ढ बना। आयनेयीनीयियः फढखछघां प्रत्ययादीनाम् से ढ् के स्थान पर एय् आदेश होकर वाराणसी+एय बना। किति च से आदिवृद्धि करके भसंज्ञक ईकार का लोप होने पर वाराणस्+एय, वर्णसम्मेलन होने पर वाराणसेय बना। सु, अम्, पूर्वरूप करके वाराणसेयम् सिद्ध हुआ।