Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 47
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VṛttiGovind
LSK 1067
वलच्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
शिखाया वलच्
Aṣṭādhyāyī 4.2.89
Vṛtti Varadarājācārya

शिखावलः।

इति चातुरार्थिकाः॥४७॥

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१०६७- शिखाया वलच्। शिखायाः पञ्चम्यन्तं, वलच् प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्। प्रत्ययः,

परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः, समर्थानां प्रथमाद्वा का पीछे से ही अधिकार आ

रहा है।

शिखा इस समर्थ सुबन्त प्रातिपदिक से चातुरार्थिक वलच् प्रत्यय होता है।

चकार इत्संज्ञक है, वल शेष रहता है।

शिखावलः। शिखाओं वाला देश। शिखाः सन्ति अस्मिन् देशे। शिखा जस् में

शिखाया वलच् से वलच् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके

शिखावल बना। स्वादिकार्य करके शिखावलः सिद्ध हुआ।

सभी प्रकरणों में तद्धितप्रकरण अत्यन्त सरल प्रकरण है। अतः ज्यादा समय

तद्धित में न लगाकर इस ग्रन्थ को पूर्ण करने का प्रयत्न करें। तद्धित में यह ध्यान देना

.....

आवश्यक है कि किस विभक्ति से युक्त शब्द से किस अर्थ में कौन सा प्रत्यय हुआ है। अर्थ भिन्न होने पर भी तद्धितप्रत्यय प्रायः एक ही होते हैं। आगे बताया जायेगा कि कालवाचक शब्दों से कोई भी अर्थ हो, प्रायः ठक् प्रत्यय ही हुआ करता है। इन विषयों में हम आगे तत्तत् प्रकरणों में बताने की चेष्टा करेंगे। इसके बाद शैषिकप्रकरण में प्रवेश करना है।

इस प्रकरण के समापन के पहले आप शुरु से यहाँ तक कौमुदी की सूत्र, वृत्ति, अर्थ और साधनी सहित पूरी आवृत्ति करें। इसके बाद यह भी देखें कि पाणिनीयाष्टाध्यायी का पारायण कैसे चल रहा है और उसका परिणाम कैसा आ रहा है? सूत्र याद हो रहे हैं कि नहीं। आप यह जान लें कि पाणिनीय अष्टाध्यायी की पूरी जानकारी के विना संस्कृतभाषा का ज्ञान अधूरा ही रह जायेगा।

परीक्षा

१- इस प्रकरण के प्रत्यय एवं उनके अर्थों पर प्रकाश डालिए।

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२- तस्य निवासः की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

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३- तदस्मिन्नस्तीति देशे तन्नाम्नि की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

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४- तेन निर्वृत्तम् की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

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५- अदूरभवश्च की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

१०

श्री वरदराजाचार्य के द्वारा रचित लघुसिद्धान्तकौमुदी में

गोविन्दाचार्य की कृति श्रीधरमुखोल्लासिनी हिन्दी व्याख्या का

चातुरर्थिक-प्रकरण पूर्ण हुआ।

अथ शैषिक-प्रकरणम्

अण्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्, अधिकारसूत्रञ्च