Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 47
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VṛttiGovind
LSK 1066
ड्वलच्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
नडशादाड्ड्वलच्
Aṣṭādhyāyī 4.2.88
Vṛtti Varadarājācārya

नड्वलः। शाद्वलः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१०६६- नडशादाड्ड्वलच्। नडश्च शादश्च तयोः समाहारद्वन्द्वो नडशादं, तस्मात्। नडशादात्

पञ्चम्यन्तं, ड्वलच् प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः,

समर्थानां प्रथमाद्वा का पीछे से ही अधिकार आ रहा है।

नड और शाद इन समर्थ सुबन्त प्रातिपदिकों से चातुरार्थिक ड्वलच् प्रत्यय

होता है।

डकार और चकार इत्संज्ञक हैं, वल बचता है। डित्करण से भसंज्ञक टि का

लोप हो जाता है।

नड्वलः। शरकंडों वाला देश। नडाः सन्ति अस्मिन् देशे। नड जस् में

नडशादाड्ड्वलच् से ड्वलच् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके

नड+वल बना। डित्त्वसामर्थ्यात् भसंज्ञा न होने पर भी टेः से टिसंज्ञक डकारोत्तरवर्ती अकार

का लोप हुआ, नड्+वल बना। स्वादिकार्य करके नड्वलः सिद्ध हुआ।

शाद्वलः। हरी घास वाला देश। शादाः सन्ति अस्मिन् देशे। शाद जस् में

नडशादाड्ड्वलच् से ड्वलच् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके

शाद+वल बना। डित्त्वसामर्थ्यात् भसंज्ञा न होने पर भी टेः से टिसंज्ञक डकारोत्तरवर्ती अकार

का लोप हुआ, शाद्+वल बना। स्वादिकार्य करके शाद्वलः सिद्ध हुआ।