Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 47
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VṛttiGovind
LSK 1064
वकारादेशविधायकं विधिसूत्रम्
झयः
Aṣṭādhyāyī 8.2.10
Vṛtti Varadarājācārya

झयन्तान्मतोर्मस्य वः। कुमुद्वान्। नड्वान्।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१०६४- झयः। झयः पञ्चम्यन्तमेकपदं सूत्रम्। मादुपधायाश्च मतोर्वोऽयवादिभ्यः से मतोः और वः की अनुवृत्ति आती है।

झय् से परे मतुप् के मकार के स्थान पर वकार आदेश होता है।

झय् प्रत्याहार है।

कुमुद्वान्। श्वेत कमल वाला देश। कुमुदाः सन्ति अस्मिन् देशे। कुमुद जस् में कुमुदनडवेतसेभ्यो ड्मतुप् से ड्मतुप् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके कुमुद+मत् बना। डित्त्वसामर्थ्यात् भसंज्ञा न होने पर भी टे: से टिसंज्ञक दकारोत्तरवर्ती अकार का लोप हुआ, कुमुद+मत् बना। अब झयः से दकार से परे मत् के मकार के स्थान पर वकार आदेश होकर कुमुद+वत्=कुमुद्वत् बना। सु, उपधा को दीर्घ, नुम्, हड्यादिलोप, तकार का संयोगान्तलोप करके हलन्त की तरह कुमुद्वान् सिद्ध हुआ। आगे कुमुद्वन्तौ, कुमुद्वन्तः, कुमुद्वन्तम्, कुमुद्वन्तौ, कुमुद्वतः आदि बनाये जा सकते हैं।

नड्वान्। शरकंडे वाला देश। नडाः सन्ति अस्मिन् देशे। नड जस् में कुमुदनडवेतसेभ्यो ड्मतुप् से ड्मतुप् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके नड+मत् बना। डित्त्वसामर्थ्यात् भसंज्ञा न होने पर भी टे: से टिसंज्ञक डकारोत्तरवर्ती अकार का लोप हुआ, नड्+मत् बना। अब झयः के द्वारा दकार से परे मत् के मकार के स्थान पर वकार आदेश होकर नड्+वत्=नड्वत् बना। सु, उपधा को दीर्घ, नुम्, हड्यादिलोप, तकार का संयोगान्तलोप करके हलन्त की तरह नड्वान् सिद्ध हुआ।