Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 47
Show
VṛttiGovind
LSK 1062
लुब्-विधायकं विधिसूत्रम्
वरणादिभ्यश्च
Aṣṭādhyāyī 4.2.82
Vṛtti Varadarājācārya

अजनपदार्थ आरम्भः। वरणानामदूरभवं नगरं वरणाः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१०६२- वरणादिभ्यश्च। वरणा आदिर्येषां ते वरणादयस्तेभ्यः। वरणादिभ्यः पञ्चम्यन्तं, च अव्ययपदं, द्विपदं सूत्रम्। जनपदे लुप् से लुप् की अनुवृत्ति आती है।

वरणा आदि शब्दों से परे चातुरार्थिक प्रत्यय का लुप् होता है।

जनपद से भिन्न अर्थ में लोप करने के लिए यह सूत्र पढ़ा गया है।

वरणाः। वरणा नदी के निकटवर्ती प्राचीन नगर। वरणानामदूरभवं नगरम्। वरणा आम् में अदूरभवश्च से अण् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके वरणादिभ्यश्च से लुक् होकर लुपि युक्तवद् व्यक्तिवचने से युक्तवद्भाव होने पर प्रकृति के अनुसार ही स्त्रीलिङ्ग और बहुवचन ही हुआ- वरणाः।