जनपदे वाच्ये चातुर्थिकस्य लुप्।
१०६०- जनपदे लुप्। जनपदे सप्तम्यन्तं, लुप् प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्।
जनपद अर्थ वाच्य होने पर चातुर्थिक प्रत्यय का लुप् होता है।
प्रकरण से ही चातुर्थिक का अर्थ जाना जाता है क्योंकि अष्टाध्यायी में ही चातुर्थिक प्रत्यय विधायक सूत्रों के बीच में इस सूत्र को पढ़ा गया है। प्रत्ययस्य लुक्श्लुलुपः के अनुसार लुक् की तरह लुप् भी प्रत्यय का अदर्शन है। लुप् होने के बाद भी यः शिष्यते स लुप्यमानार्थाभिधायी अर्थात् लुप् होने के बाद जो शेष रहता है वह लुप्त हुए प्रत्यय का अर्थ को कह देता है।