Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 47
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VṛttiGovind
LSK 1056
अण्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
तदस्मिन्नस्तीति देशे तन्नाम्नि
Aṣṭādhyāyī 4.2.67
Vṛtti Varadarājācārya

उदुम्बराः सन्त्यस्मिन् देशे- औदुम्बरो देशः।

‘श्रीधरमुखोल्लासिनी’

ये चार अर्थ हैं-

(२) उसने बनाया या बसाया- ऐसा नगर,

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

अब चातुरर्थिक प्रकरण का आरम्भ होता है। इस प्रकरण में चार अर्थों में प्रत्यय का विधान किया गया है, इसलिए चातुरर्थिक प्रकरण कहा गया।

(१) वह इस में है, ऐसा देश,

(३) उसका निवास है, ऐसा देश और

(४) जो उससे दूर नहीं ऐसा देश।

उक्त चारों अर्थ देश के सम्बन्ध में ही होंगे। उनका क्रमशः उदाहरण आगे के सूत्रों से बताये जा रहे हैं।

१०५६- तदस्मिन्नस्तीति देशे तन्नाम्नि। तस्य नाम तन्नाम, तस्मिन्। तद् प्रथमान्तानुकरणं लुप्तपञ्चम्यन्तम्, अस्मिन् सप्तम्यन्तम्, अस्ति क्रियापदम्, इत्यव्ययपदं, देशे सप्तम्यन्तं, तन्नाम्नि सप्तम्यन्तम् अनेकपदमिदं सूत्रम्। प्राग्दीव्यतोऽण् से अण् की अनुवृत्ति आ रही है और प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः, समर्थानां प्रथमाद्वा का पीछे से ही अधिकार आ रहा है। यदि प्रकृति और प्रत्यय के समूह से देश का नाम बनता हो तो ‘वह इस देश में है’ इस अर्थ में प्रथमान्त समर्थ प्रातिपदिक से अण् प्रत्यय होता है।

तात्पर्य यह है कि जिस शब्द से अण् हो, उस अण्-प्रत्ययान्त शब्द किसी देश की संबन्ध में है। जैसे- उदुम्बर अर्थात् गूलर के पूंड हैं जिस देश में वह देश औदुम्बर कहलाता है। स अण् प्रत्यय करके बनाये गये औदुम्बर शब्द से देश का नाम ज्ञात हो रहा है।

औदुम्बरः। उदुम्बर अर्थात् गूलर के पेड़ हैं जिस देश में वह देश। उदुम्बराः सन्ति अस्मिन् देशे लौकिक विग्रह और उदुम्बर जस् अलौकिक विग्रह। तदस्मिन्नस्तीति देशे तन्नाम्नि से अण् प्रत्यय करके प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके उदुम्बर+अ बना। तद्धितेष्वचामादेः से आदि अच् उकार की वृद्धि करके औकार आदेश और भसंज्ञक रकारोत्तरवर्ती अकार का लोप करके औदुम्बर+अ=औदुम्बर, सु आदि करके औदुम्बरः बना। इसी प्रकार पर्वताः सन्ति अस्मिन् देशे पार्वतो देशः आदि भी बनाइये।