कुशाम्बेन निर्वृत्ता नगरी कौशाम्बी।
१०५७- तेन निर्वृत्तम्। तेन तृतीयान्तानुकरणं लुप्तपञ्चम्यन्तं, निर्वृत्तं प्रथमान्तं द्विपदमिदं सूत्रम्। प्राग्दीव्यतोऽण् से अण् की अनुवृत्ति आ रही है और प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः, समर्थानां प्रथमाद्वा का पीछे से ही अधिकार आ रहा है।
यदि प्रकृति और प्रत्यय के समूह से देश का नाम बनता हो तो 'उसके बनाया गया या बसाया गया' इस अर्थ में तृतीयान्त समर्थ प्रातिपदिक से अण् प्रत्यय होता है।
कौशाम्बी। कुशाम्ब नामक राजा से बनाई या बसाई गई नगरी। कुशाम्बेन निर्वृत्ता लौकिक विग्रह और कुशाम्ब टा अलौकिक विग्रह। तेन निर्वृत्तम् से अण् प्रत्यय करके प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके कुशाम्ब+अ बना। तद्धितेष्वचामादेः से आदि अच् ककारोत्तरवर्ती उकार की वृद्धि करके औकार आदेश और भसंज्ञक रकारोत्तरवर्ती अकार का लोप करके कौशाम्ब+अ=कौशाम्ब बना। विशेष्य नगरी के स्त्रीलिङ्ग होने के कारण टिड्ढाणञ् ) सूत्र से डीप् होकर कौशाम्बी बना। उससे सु आदि, हल्ड्याब्भ्यो लोप होकर कौशाम्बी बना।